ट्रंप के गोल्ड कार्ड का भारतीयों पर क्या होगा असर, क्या इससे अमेरिकी खजाने को मिलेगी मजबूती, जानें हर बात…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इन दिनों लगातार नई नीतियों और योजनाओं की घोषणा कर रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने एक नया वीजा और नागरिकता प्रोग्राम लॉन्च किया है, जिसे ट्रंप गोल्ड कार्ड नाम दिया गया है। ट्रंप के अनुसार, बुधवार से लोग इस गोल्ड कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे।
ट्रंप ने क्या किया दावा?
ट्रंप का दावा है कि यह नया प्रोग्राम अमेरिकी खजाने में अरबों डॉलर जोड़ सकता है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर उन्होंने लिखा, ट्रंप गोल्ड कार्ड आज से शुरू! योग्य और जांचे-परखे आवेदकों के लिए नागरिकता तक सीधा रास्ता। हमारी कंपनियां अब अपनी बेहतरीन प्रतिभाओं को अमेरिका में रोक कर रख सकेंगी।
ट्रंप ने बताईं गोल्ड कार्ड की खास बातें
ट्रंप के अनुसार यह कार्ड ग्रीन कार्ड जैसा ही है, लेकिन इसके जरिए प्राप्त होने वाला धन सीधे अमेरिकी सरकार के खजाने में जाएगा। उन्होंने बताया कि कोई भी कंपनी किसी भी यूनिवर्सिटी से प्रतिभाशाली छात्र चुनकर उनके लिए गोल्ड कार्ड खरीद सकती है। इससे अमेरिका में टैलेंट बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उच्च फीस के कारण यह प्रोग्राम विशेषकर अंतरराष्ट्रीय छात्रों और प्रोफेशनल्स पर बड़ा असर डालेगा। ट्रंप ने कहा कि कई प्रतिभाशाली छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत, चीन या फ्रांस लौट जाते हैं। गोल्ड कार्ड इस प्रवृत्ति को रोकने में मदद कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बड़ी कंपनियां, खासकर टेक सेक्टर, इस प्रोग्राम को लेकर उत्साहित हैं।
भारतीयों पर इसका क्या असर होगा?
भारतीय आवेदकों के लिए यह प्रोग्राम बेहद महंगा साबित हो सकता है। सामान्य आवेदक को 9 करोड़ से अधिक चुकाने होंगे। जबकि धनकुबेर लोग 5 मिलियन डॉलर (लगभग 44 करोड़) देकर गोल्ड कार्ड ले सकेंगे। EB-5 वीजा में लोग लोन लेकर या पैसा मिलाकर निवेश कर सकते थे, लेकिन गोल्ड कार्ड के लिए पूरा पैसा नकद देना अनिवार्य है।
यही वजह है कि यह अधिकांश भारतीयों की पहुंच से बाहर हो जाएगा। फिर भी अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीय गोल्ड कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते वे निर्धारित राशि जुटा सकें।
