सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में पहली बार दी इच्छामृत्यु की मंजूरी, यह होती क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 31 वर्षीय एक व्यक्ति के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी। यह शख्स 12 वर्षों से अधिक समय से कोमा की स्थिति में था। अब उसकी कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली को हटाया जाएगा। हरीश राणा 2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरने के बाद सिर में गंभीर चोटों का शिकार हो गए थे और एक दशक से अधिक समय से कोमा में हैं। आइए जजानतें हैं कि क्या है निष्क्रिय इच्छामृत्यु? कौन हैं हरीश राणा? सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लिया यह फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 31 वर्षीय एक व्यक्ति के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी। यह शख्स 12 वर्षों से अधिक समय से कोमा की स्थिति में था। अब उसकी कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली को हटाया जाएगा। हरीश राणा 2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरने के बाद सिर में गंभीर चोटों का शिकार हो गए थे और एक दशक से अधिक समय से कोमा में हैं। आइए जजानतें हैं कि क्या है निष्क्रिय इच्छामृत्यु?
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लिया यह फैसला?
प्राथमिक चिकित्सा समिति ने मरीज की हालत की जांच करने के बाद उसके ठीक होने की संभावना नगण्य होने पर जोर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर को कहा था कि प्राथमिक चिकित्सा बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उस व्यक्ति की हालत दयनीय है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2023 में जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, कोमा में पड़े मरीज के लिए कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली को हटाने के संबंध में विशेषज्ञ की राय लेने के लिए एक प्राथमिक और एक द्वितीयक चिकित्सा बोर्ड का गठन करना होगा।
क्या होती है निष्क्रिय इच्छामृत्यु?
निष्क्रिय इच्छामृत्यु में किसी मरीज को जानबूझकर मरने देने के लिए जीवन रक्षक उपकरण या जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक उपचार को रोक दिया जाता है या वापस ले लिया जाता है। इस मामले की सुनवाई के दौरान नोएडा के एक अस्पताल के प्राथमिक बोर्ड की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट की जांच करने वाली न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा, ‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लड़के की हालत दयनीय नजर आती है।
