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April 1, 2026

भारत के लिए कितने अहम बांग्लादेश के चुनाव: नतीजों से कैसे पड़ सकता है प्रभाव, किस पार्टी का क्या रुख…

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बांग्लादेश में आज आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव के साथ ही यह तय हो गया है कि अब कुछ ही दिनों में जब भारत अपने रिश्तों को लेकर बांग्लादेश से संपर्क में होगा, तब उसकी बात मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार नहीं, बल्कि एक स्थायी-चुनी हुई सरकार से होगी। ऐसे में शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद अब भारत के लिए अगली सरकार से चर्चा की रणनीति काफी अहम होने वाली है। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर बांग्लादेश के चुनाव भारत के लिए कितने अहम हैं? किस तरह इस चुनाव के नतीजे दोनों देशों के रिश्तों को आगे प्रभावित कर सकते हैं? इसके अलावा इन चुनावों के मुद्दे क्या हैं? इन पर और भारत को लेकर किस पार्टी का क्या रुख है?

1971 में बांग्लादेश की आजादी के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। हालांकि, 21वीं सदी के अधिकतर हिस्से में भारत-बांग्लादेश परस्पर सहयोगी रहे हैं। शेख हसीना के नेतृत्व में (2009-2024) के बीच बांग्लादेश सरकार ने भारत के पूर्वोत्तर में फैले उग्रवाद को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई। खासकर उल्फा और एनडीएफबी जैसे संगठन, जो कभी बांग्लादेश से सप्लाई होने वाले हथियारों के जरिए भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देते थे, उनकी गतिविधियों को रोकने में खासी सफलता हासिल हुई। बांग्लादेश की तरफ से इस तरह के कूटनीतिक सहयोग में किसी तरह का बदलाव भारत के उत्तर में स्थित क्षेत्र के लिए सुरक्षा का मुद्दा बन सकता है।

कौन सी पार्टियां लड़ रहीं चुनाव, किसका-कैसा रुख?
बांग्लादेश में चार पार्टियां मुख्य तौर पर मुकाबले में हैं। हालांकि, इसमें अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की आवामी लीग शामिल नहीं है। दरअसल, बीते साल जब हसीना के शासन के खिलाफ छात्र आंदोलन हिंसक हो गया तब वे बांग्लादेश छोड़कर भारत आने को मजबूर हो गईं। इसके बाद बांग्लादेश में बनी मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने कट्टरपंथी ताकतों के दबाव में न सिर्फ आवामी लीग को प्रतिबंधित कर दिया, बल्कि शेख हसीना के खिलाफ उनकी गैरमौजूदगी में कई केस भी चलवाए। इनमें से एक केस का फैसला इसी साल नवंबर में आया, जिसमें अपदस्थ पीएम को मौत की सजा सुनाई गई। चूंकि शेख हसीना भारत में हैं, इसलिए उन्हें सजा नहीं दी जा सकती। बांग्लादेश में यह भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है।

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