छत्तीसगढ़

रविवासरीय संगीत सभा में अर्चना आश्रिता ने दी बेला-वादन की प्रस्तुति

रायपुर
पंडित गुणवंत माधवलाल व्यास स्मृति संस्थान की 77वीं प्रात: कालीन संगीत सभा में रविवार को प्रात: 10 बजे से फेसबुक पर वाराणसी के प्रसिद्ध गुरु पंडित सुखदेव प्रसाद मिश्र एवं प्रसिद्ध संगीतज्ञ डॉ रामशंकर की शिष्या अर्चना आश्रिता ने शास्त्रीय बेला-वादन की प्रस्तुति दी।

अर्चना जी बेला (वॉयलिन) को गायकी अंग से बखूबी बजा रही हैं। उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरूआत राग-बिलासखानी तोड़ी,में सुंदर अलाप-जोड़-झाला से करने के बाद,विलंबित एकताल पर आधारित बंदिश-धन-धन भाग,की प्रस्तुति दी।उन्होंने सुंदर अलाप में राग का पूरा स्वरूप दिखाने के बाद,विविध प्रकार की लयकारी से अपना कौशल दिखाया।इसके बाद उन्होंने मध्यलय त्रिताल में निबद्ध राम रंग जी की बंदिश-जगदंबिका अम्बिका,की सुमधुर प्रस्तुति दी।द्रुत गत-तीनताल में बजाने के बाद, अंकिता ने अपने कार्यक्रम का समापन अपने गुरुजी पंडित सुखदेव प्रसाद मिश्र जी द्वारा राग-भैरवी,द्रुत तीनताल में निबद्ध गत से किया।अंकिता का वॉयलिन पर गज का सधा हुआ चलन श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रहा था,चैनदारी से अलाप-जोड़-झाला और सुंदर लयकारी को श्रोताओं ने खूब सराहा।

इस कार्यक्रम को फेसबुक पर बनारस से संस्था के-गुनरस पिया संगीत सभा ग्रुप से शास्त्रीय संगीत के श्रोताओं के लिए फेसबुक पर लाईव किया गया। श्रोताओं ने खूब लाईक किया और उनके कार्यक्रम में लगातार दाद दी। गुनरस पिया की सभा में अब तक देश-विदेश के गुणी कलाकारों ने गायन,तबला-वादन,सितार-सरोद-सारंगी-संतूर वादन की प्रस्तुतियां दीं हैं।युवा एवं नवोदित कलाकारों को रविवासरीय संगीत सभा के माध्यम से जन जन तक पहुचाने का कार्य संस्था द्वारा अनवरत जारी है। गुनरस पिया फाउंडेशन द्वारा कोरोना काल में देश-विदेश के कलाकारों को फेसबुक के माध्यम से कार्यक्रम प्रस्तुति हेतु अवसर दिया जा रहा है।गुनरस पिया फाउंडेशन शास्त्रीय संगीत के संरक्षण एवं प्रचार प्रसार हेतु लगातार कार्य कर रहा है।कार्यक्रम के संयोजक श्री दीपक व्यास ने यह जानकारी दी।

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