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उम्मीदें बजट 2022-23: टैक्स से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की आस

नई दिल्ली।  
इस साल बजट में आम लोगों के साथ उद्योग जगत को जीवन बीमा और पेंशन उत्पादों पर कर छूट का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर की धारा 80सी के तहत मिलने वाली मौजूदा टैक्स छूट पर्याप्त नहीं है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अपना चौथा बजट एक फरवरी को पेश करेंगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संकट में बढ़ते खर्च को देखते हुए यदि करदाताओं को टैक्स में अधिक छूट मिलेगी तभी वह जीवन बीमा समेत अन्य विकल्पों में निवेश कर पाएंगे। साथ ही उनके पास खर्च के लिए जो राशि बचेगी वह अंतत: बाजार में आएगी जिससे अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि मौजूदा स्थिति में कर ढांचा जटिल है।

कई सारे उपकर, अधिभार, कर की दरें और स्लैब हैं। इसके अलावा छूट के बिना कम दर पर कर देने की सुविधा या छूट के साथ सामान्य दर पर कर के भुगतान की व्यवस्था ने करदाताओं के लिये कर संरचना को जटिल बना दिया है। उन्होंने कहा, ऐसे में यह बेहतर होगा कि सरकार चार दरों का एक सरल आयकर ढांचा लागू करे और उपकरों तथा अधिभारों को समाप्त करे। यह राज्यों के लिये भी न्यायसंगत होगा। बजट में सरकार के लिये प्राथमिकता के बारे में पूछे जाने पर पूर्व वित्त सचिव ने कहा कि वित्त मंत्री के लिये मुख्य चिंता 2022-23 के बजट में बढ़ती खाद्य, उर्वरक सब्सिडी के साथ मनरेगा पर बढ़े हुए खर्च को काबू में लाने की होगी।
 

धारा 80सी में छूट पर्याप्त नहीं
आयकर की इस धारा के तहत ईपीएफ, पीएफ, आवास ऋण के मूलधन का भुगतान, जीवन बीमा प्रीमियम का भुगतान, सुकन्या समृद्धि खाता समेत अन्य बचत पर टैक्स छूट मिलती है जिसकी मौजूदा सीमा 1.50 लाख रुपये है। टैक्स सलाहकार के.सी.गोदुका का कहना है कोई व्यक्ति होम लोन का भुगतान कर रहा है और उसने 1.50 लाख रुपये की छूट उसपर ले लेता है तो वह 80सी के तहत अन्य बचत उत्पादों में छूट का हकदार नहीं होगा। इसी तरह कोई व्यक्ति जीवन बीमा प्रीमियम, ईपीएफ, पीएफ पर कुल 1.50 लाख रुपये की छूट ले लेता है तो वह होम लोन के मूलधन पर टैक्स छूट का दावा नहीं कर सकता है। उनका कहना है कि मौजूदा समय में महंगाई, कोरोना संकट में बढ़ते खर्च को देखते हुए धारा 80सी के तहत वर्तमान छूट पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाने की जरूरत है।

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