छत्तीसगढ़

9 दिन में 36 लाख मीट्रिक टन धान उपार्जन असंभव, खरीदी तिथि 28 फरवरी तक बढ़ाने की मांग

रायपुर
मौसम की प्रतिकूलता खत्म होने पर अवकाश के दिनों को छोड़ शासन द्वारा सोसायटियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर किसानों से धान उपार्जन हेतु महज 9 दिन बाकी है और इन 9 दिनों में लगभग 7 लाख किसानों के शेष बचे 36 मिट्रिक धान खरीदी किया जाना है। हो रहे असामयिक बरसात के चलते धान खरीदी में आ रहे व्यवधान के जमीनी हकीकत को देखते हुये खरीदी तिथि में बढ़ोतरी की मांग प्रदेश में मुखर होने लगा है।

किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेन्द्र शर्मा व पवन दीवान स्मृति न्यास समिति के सचिव अनिल तिवारी ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व कृषि मंत्री रवीन्द्र चौबे को मेल से ज्ञापन प्रेषित कर 28 फरवरी तक खरीदी तिथि में बढ़ोतरी की अविलंब घोषणा किये जाने की मांग की है ताकि किसान निश्चिन्त हो सके व किसानों तथा समिति कर्मियों के मध्य तनातनी की नौबत न आने पाये। शर्मा ने जानकारी दी है कि वर्तमान कृषि वर्ष में प्रदेश सरकार ने पंजीकृत लगभग 24 लाख किसानों से 105 लाख मीट्रिक टन धान सोसायटियों के अधीन बनाये गये करीबन 2400 धान उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से लेने का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। शासन द्वारा धान उपार्जन की तिथि दिसंबर व जनवरी माह निर्धारित किये जाने पर इन दोनों माह के 62 दिनों में से अवकाश के दिनों को छोड़ वास्तविक रूप से महज 43 दिन ही धान खरीदी हो पाने की जानकारी देते हुये उन्होंने बतलाया है कि इस खरीदी में भी दिसंबर के आखिरी सप्ताह से हो रहे असामयिक बरसात ने खलल डाल रखा है। 29 दिसंबर से 5 जनवरी व फिर 10 जनवरी से लेकर आज तक हो रहे कमोबेश बारिश की वजह से पूरे प्रदेश में खरीदी प्रभावित होने व कमोबेश ठप्प रहने की जानकारी देते हुये उन्होंने आगे बतलाया है कि शासकीय आंकड़े के अनुसार ही करीबन 17 लाख किसानों से 68 . 65 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी जहां हो पाया है वहीं खरीदे गये धान में से महज 33 . 63 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है और 31 . 20 लाख मीट्रिक टन धान के उठाव हेतु डी ओ जारी किया जा चुका है।

लगातार असामयिक बरसात की वजह से खरीदी में आ रहे व्यवधान की जमीनी हकीकत की जानकारी देते हुये  बतलाया कि बरसात की वजह से फड़ पूरा गीला है। बरसात रुकने पर भाठा भूमि पर बने फड़ तो जल्दी सूख जाने की वजह से खरीदी लायक हो जावेगा पर कन्हार भूमि का फड़ नहीं। इसी तरह बरसात  की वजह से खरीदी केन्द्रों के अत्यधिक गीला हो जाने की वजह से प्रभावी परिवहन भी संभव नहीं हो पा रहा। प्रभावी परिवहन के प्रत्याशा में उपार्जन केन्द्रों के क्षमता के विरूद्ध प्रतिदिन खरीदी का कम लक्ष्य भी शासन द्वारा निर्धारित कर देने व अनेकों ग्रामों में इस बरसात की वजह से कटाई – मिसाई ठप्प रहने तथा परिवहन हेतु ट्रकों को भरने खरीदी में लगे हमालो का उपयोग से खरीदी प्रभावित होने की जानकारी देते हुये बतलाया कि इन व्यवहारिक जमीनी हकीकत के चलते निर्धारित 31जनवरी तक खरीदी पूर्ण हो पाना किसी भी हालत में असंभव है और समयसीमा में तत्काल बढ़ोतरी की घोषणा न होने पर सोसायटी कर्मियों व किसानों के बीच रोजाना तनातनी दिखेगा। किसानों की निश्चिंतता के लिये शीघ्र ही समयसीमा बढ़ोतरी की घोषणा का आग्रह किया गया है।

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