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राज्य शासन ने भू-अभिलेख के SLR- ASLR को तहसीलदार के पॉवर देने का लिया निर्णय

भोपाल
राज्य शासन ने अधीक्षक भू-अभिलेख (एसएलआर) और सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख (एएसएलआर) को तहसीलदार के पॉवर देने का निर्णय लिया है। लेकिन इसके लिए नोटिफिकेशन के बाद नया आदेश जारी कर यह भी साफ कर दिया है कि सभी को यह पॉवर नहीं मिलेंगे। केवल वही एसएलआर और एएसएलआर तहसीलदार और नायब तहसीलदार की शक्तियां पा सकेंगे, जिन्होंने विभागीय परीक्षा पास कर ली है। साथ ही उन्हें तहसीलदार और नायब तहसीलदार की शक्तियां देने के लिए प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय ने अनुमति दे दी है।

राजस्व विभाग द्वारा इसको लेकर जारी आदेश में कहा गया है कि जिन जिलों में नायब तहसीलदार और तहसीलदार के पद रिक्त हैं, उन जिलों में एएसएलआर और एसएलआर को अधिकार देने के लिए संबंधित जिलों के कलेक्टर प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय को प्रस्ताव भेजेंगे। इस प्रस्ताव का अनुमोदन होने के बाद कलेक्टर संबंधित तहसील में उन्हें पदस्थ कर न्यायिक शक्तियां दे सकेंगे।

कलेक्टरों को यह ध्यान रखना होगा कि जिसका प्रस्ताव भेजा जाएगा उसे विभागीय परीक्षा पास होना जरूरी होगा। गौरतलब है कि इसके पहले राजस्व विभाग द्वारा किए गए नोटिफिकेशन में भू राजस्व संहिता की धारा 24 के अंतर्गत एएसएलआर और एसएलआर को तहसीलदार की शक्तियां देने का नोटिफिकेशन किया गया है। राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद एसएलआर और एएसएलआर की लंबे समय से तहसीलदार की शक्तियां दिए जाने की डिमांड पूरी हो गई है।

पिछले महीनों में भोपाल और इंदौर के कलेक्टरों ने राजस्व न्यायालयों में कार्यपालिक अधिकारियों की कमी के चलते एएसएलआर को नायब तहसीलदार की जिम्मेदारी सौंपी थी। इस पद के अफसरों को यह अधिकार नहीं होने से राजस्व अधिकारियों ने इसका विरोध भी किया था। अब इनकी पदस्थापना कलेक्टर राजस्व न्यायालयों में न्यायालयीन कार्य निपटारे के लिए कर सकेंगे। अभी तक इनके पास लैंड रिकार्ड और मैनेजमेंट की जिम्मेदारी रहती आई है।

ब प्रमोशन न हो पाने के चलते फील्ड में तहसीलदारों की कमी की भरपाई एसएलआर को मिले पॉवर से हो सकेगी। गौरतलब है एएसएलआर और नायब तहसीलदार पीएससी से भरे जाने वाले तृतीय श्रेणी के पद हैं जो राजस्व विभाग के पद हैं लेकिन तहसीलदार को राजस्व न्यायालय के अधिकार रहते हैं जबकि एएसएलआर को ये शक्तियां प्राप्त नहीं थीं। अब इन्हें भी राजस्व न्यायालय के अधिकार मिल गए हैं।

कम होंगे राजस्व न्याायालय के पेंडिंग केस
प्रदेश में नायब तहसीलदार और तहसीलदार की कमी के चलते राजस्व न्यायालय संबंधी लाखों केस पेंडिंग हैं। राजस्व विभाग द्वारा इस तरह की व्यवस्था किए जाने के बाद जिलों में राजस्व न्यायालय संचालन तेज होगा और पेंडिंग रेवेन्यू केस के निपटारे में तेजी आएगी। खासतौर पर नामांतरण, बंटवारे के मामले में तेजी से निराकरण की स्थिति बनेगी। इतना ही नहीं तहसील कार्यालयों में अधिकारियों की गैरमौजूदगी के चलते खाली लौटने वाले किसानों, भूमि स्वामियों की सुनवाई भी हो सकेगी। अभी स्थिति यह है कि कई जिलों में एक तहसीलदार और नायब तहसीलदार के पास दो से तीन क्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार है।

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