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मकर संक्रांति का पर्व आज, ठाकुरजी उड़ा रहे सोने की पतंग

जयपुर
विभिन्न योग संयोगों में आज मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 8.05 से शाम 5.50 बजे तक ही है. आज दिनभर पतंगें कुलांचे भरेंगी, दिनभर चरखियां घूमेंगी, डोर आसमान नापेगी. राधे-रानी चांदी की चरखी पकड़े हैं और ठाकुरजी सोने की पतंग उड़ा रहे हैं. उमंग-उत्साह के बीच शहरवासी दिनभर छतों पर रहेंगे. दिनभर दानपुण्य का दौर चलेगा.

इस बार कोरोनाकाल के कारण गलताजी में आस्था की डुबकी नहीं लगाई जा सकेगी. ज्योतिषविदों के मुताबिक, मकर संक्रांति का पर्व विभिन्न योग संयोगों में मनाया जाएगा. सूर्य का मकर राशि में दिन के 2.29 बजे प्रवेश होगा. तिल दान, गौसेवा सहित अन्य पुण्य करना सभी राशि के जातकों के लिए फलदायी रहेगा. संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 8.05 से शाम 5.50 बजे तक रहेगा. मकर संक्रांति से मलमास की समाप्ति होगी.

पिंकसिटी के वाशिंदे दिनभर घरों की छतों पर होंगे और आसमान में पतंगे ही पतंगे नजर आएंगी. वहीं गोविंददेवजी मंदिर में राधे-रानी चांदी की चरखी पकडेगी और ठाकुरजी सोने की पतंग उड़ाते हुए नजर आएंगे. सुबह से ही दान पुण्य का दौर छोटीकाशी में चलेगा लेकिन हर बार की तरह इस बार कोरोनाकाल के कारण गलताजी में आस्था की डुबकी नहीं लगाई जा सकेगी. पतंगों में तंग डालने से लेकर छतों पर म्यूजिक सिस्टम लगाने तक की तैयारियां एक दिन पहले ही कर ली. सभी बस सुबह का इंतजार कर रहे हैं.

आगामी समय वैभवकारक, सुख समृद्धि कारक बनेगा
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, पौष शुक्ल प्रतिपदा सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन त्रिग्रही योग भी रहेगा. मकर राशि में शनि, बुध और सूर्य देव एक साथ रहेंगे. रोहिणी नक्षत्र में संक्रांति बाघ पर सवार होकर धोबी के घर में प्रवेश कर रही है. वारनाम मिश्रा बनने से पशुपालकों और डेयरी उत्पादकों को प्रगतिकारक फल प्राप्त होंगे. शुक्ल योग, शुक्रवार को संक्रांति रहने से आगामी समय वैभवकारक, सुख समृद्धि कारक बनेगा. सिंह, मेष, वृश्चिक, मीन राशि के लिए विशेष प्रगतिकारक, मिथुन, तुला और कुंभ राशि के जातकों को सामान्य और वृषभ, कर्क, कन्या, मकर धनु राशि के जातकों को मध्यम फल मिलेगा. संक्रांति के प्रवेश के समय संक्रांति शरीर पर कुमकुम का लेप लगाकर पीले रंग के वस्त्र, चमेली पुष्प की माला धारण कर हाथ में गदा का शस्त्र लेकर चांदी के बर्तन में खीर का भोजन करती हुई बैठी हुई स्थिति में कुमारी अवस्था में दिन के द्वितीय भाग में प्रवेश कर रही है. सभी राशि के जातकों को सूर्यदेव को जलअर्पित कर सूर्य नमस्कर करें.

जिला कलेक्टर ने घोषित कर दिया संक्रांति का अवकाश
जिला कलेक्टर ने पहले ही संक्रांति का अवकाश घोषित कर दिया है. ऐसे में मकर संक्रांति पर दिनभर चरखियां घूमेंगी, डोर आसमान नापेगी. पतंगें यहां से वहां कुलांचें भरेंगी. ''वो काटा, वो मारा, काटा रे…की गूंज के बीच ज्यादातर जगह नाश्ता-भोजन भी छत पर होगा. तिल के लड्डू खाए और खिलाएं जाएंगे. रंग-बिरंगी और छोटी-बड़ी पतंगों से गुलाबीनगरी का आसमान पटा देखने के लिए सैलानी भी शहर पहुंच चुके हैं. तिल के लड्डू, फीणी, पकौड़ी सहित अन्य पकवानों को तैयार करने में गृहिणियां व्यस्त रहेंगी. युवाओं ने डीजे भी बुक किए ताकि दोस्तों, परिवारजन के साथ पुराने और नए गानों की धुनों पर पतंगबाजी पूरे आनंद के साथ कर सकें. प्रशासन ने सुबह 6 से 8 बजे तक और शाम 5 से 7 बजे तक के बीच पतंग उड़ाने पर रोक लगाई है. साथ ही प्लास्टिक, सिथेंटिक, लोहा, ग्लास और अन्य हानिकारक पदाार्थों से बने मांझे का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित है.

भगवान सूर्य की आराधना का पर्व है संक्रांति
बहरहाल, शास्त्रानुसार यह पर्व भगवान सूर्य की आराधना का पर्व है. इस दिन पवित्र तीर्थों में स्नान और दान का काफी महत्व है. नक्षत्रनाम मन्दा होने से इस माह में वैज्ञानिकों और विद्वज्जनों का रचनात्मक कार्यों में मन लगा रहेगा. संक्रांति प्रवेश के समय बालव करण रहेगा, जिससे इसका वाहन बाघ व उपवाहन घोड़ा बनेगा. भूतजाति की यह संक्रांति शरीर पर कुंकुम का लेप लगाकर पीले रंग के वस्त्र एवं चमेली के पुष्प की माला धारण करके हाथ में गदा शस्त्र लेकर चांदी के बर्तन में खीर का भोजन करती हुई बैठी हुई स्थिति में कुमारी अवस्था में दिन के द्वितीय भाग में प्रवेश कर रही है.

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