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भारत की mRNA वैक्सीन ओमिक्रॉन के खिलाफ दिलाएगी जीत ? जल्द फैसला लेगी सरकार

नई दिल्ली
देश की पहली मैसेंजर mRNA वैक्सीन का इंसानों पर ट्रायल शुरू होने वाला है। सूत्रों की मानें तो इसका ट्रायल फरवरी में शुरू होने की उम्मीद है। पुणे स्थित जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स ने एमआरएनए वैक्सीन के फेज 2 के आंकड़े जमा कर दिए हैं और फेज 3 डेटा के लिए भर्ती भी पूरी कर ली है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) की विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) जल्द ही आंकड़ों की समीक्षा कर सकती है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स ने ओमिक्रॉन वैरिएंट के लिए एमआरएनए वैक्सीन विकसित की है, जिसका परीक्षण जल्द ही मनुष्यों पर प्रभावकारिता और इम्यूनोजेनेसिटी के लिए किया जाएगा।

क्या है वैक्सीन का नाम
इससे पहले सितंबर 2021 के महीने में, जेनोवा ने एक प्रेस बयान जारी कर टीकों के परीक्षणों के बारे में अपडेट किया था। इसने कहा था, "भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ने, अगस्त में जेनोवा बायोफर्मासिटिकल्स लिमिटेड ("जेनोवा") द्वारा विकसित भारत के पहले mRNA- आधारित COVID-19 वैक्सीन, HGCO19 के लिए चरण II और चरण III अध्ययन प्रोटोकॉल को मंजूरी दी थी।" इसने कहा, "जेनोवा ने भारत सरकार के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण (एनआरए) के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को चरण I के अध्ययन का अंतरिम नैदानिक डेटा प्रस्तुत किया था।

काफी प्रभावी साबित हो सकती है वैक्सीन
जेनोवा ने भारत सरकार के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण (एनआरए) यानी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को चरण I के अध्ययन के अंतरिम नैदानिक ​​डेटा को प्रस्तुत किया था। वैक्सीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) ने अंतरिम चरण I डेटा की समीक्षा की थी, और पाया कि HGCO19 अध्ययन भाग लेने वाले लोगों में सुरक्षित, सहनीय और इम्युनोजेनिक था।"

कहां-कहां चल रहे ट्रायल
कंपनी ने ट्रायल स्थलों की संख्या का भी उल्लेख किया, इसने कहा, "भारत में अध्ययन चरण II में लगभग 10-15 साइटों और चरण III में 22-27 साइटों पर किया जा रहा है। जेनोवा इस अध्ययन के लिए डीबीटी-आईसीएमआर नैदानिक परीक्षण नेटवर्क साइटों का उपयोग कर रही है।" एमआरएनए टीके न्यूक्लिक एसिड टीकों की कैटेगरी से संबंधित हैं। इसमें बीमारी पैदा करने वाले वायरस या पैथोजन से जेनेटिक मटेरियल का उपयोग किया जाता है। जिससे शरीर के अंदर वायरस के खिलाफ इम्यून रिस्पांस सक्रिय हो सके। सभी वैक्सीन को शरीर में इसलिए डाला जाता है ताकि वो संक्रमण पैदा करने वाले कारण की पहचान कर सके और भविष्य में ऐसे किसी वायरस के हमले पर एंटिबॉडी का निर्माण हो।

 

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