जनगणना ड्यूटी से जी चुराने वाले 1000 कर्मचारियों पर गिरेगी गाज, कमिश्नर के सख्त आदेश…

महानगर में जनगणना के महा-अभियान में अड़ंगा डालने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नगर निगम ने अब आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। जनगणना ड्यूटी से भागने वाले 1000 से ज्यादा कर्मचारियों पर अब पुलिस केस (FIR) दर्ज करने की तैयारी मुकम्मल कर ली गई है। नगर निगम कमिश्नर डॉ. नीरू कत्याल ने कड़ा रुख अपनाते हुए चारों जोनों के जनगणना अफसरों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जो भी कर्मचारी ड्यूटी किट लेने नहीं पहुंचा है, उसके खिलाफ ‘जनगणना अधिनियम 1948’ के तहत तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर ने न केवल कानूनी कार्रवाई, बल्कि आर्थिक चाबुक चलाने के भी आदेश दिए हैं। संबंधित विभागों के प्रमुखों को कह दिया गया है कि ड्यूटी से नदारद रहने वाले इन कर्मचारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए और इसकी विस्तृत रिपोर्ट निगम कार्यालय भेजी जाए। गौरतलब है कि लुधियाना में जनगणना की कमान संभाल रहीं डॉ. नीरू कत्याल ने विभिन्न विभागों और निजी संस्थानों के करीब 6500 कर्मचारियों को इस महत्वपूर्ण कार्य में तैनात किया था। हैरानी की बात यह है कि ये कर्मचारी निगम द्वारा आयोजित ट्रेनिंग सेशन में तो शामिल हुए, लेकिन जब किट और आईकार्ड ले जाने की बारी आई, तो इनमें से 1000 से ज्यादा कर्मचारी गायब हो गए। जोनल कमिश्नर जसदेव सिंह सेखों ने बताया कि पिछले 3-4 दिनों से किट बांटी जा रही थी और वीरवार सुबह से ही अफसरों ने इन कर्मचारियों से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला।
डॉ. नीरू कत्याल ने बताया कि 15 मई से 13 जून तक चलने वाले इस पहले चरण में प्रत्येक कर्मचारी को 150 घरों की लिस्टिंग करनी है। अगर कोई कर्मचारी रोजाना सिर्फ 5-6 घरों का सर्वे भी करे, तो काम आसानी से पूरा हो सकता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि जनगणना ड्यूटी बीच में छोड़ना या इनकार करना नौकरी के लिए भी संकट पैदा कर सकता है, क्योंकि इसमें सजा और जुर्माने दोनों का प्रावधान है। आज से घर-घर जाकर सर्वे का काम शुरू हो रहा है और जो लोग खुद ‘स्वगणना’ कर चुके हैं, उन्हें केवल अपनी एसई आईडी (SE ID) दिखानी होगी। निगम ने जनता को भरोसा दिलाया है कि उनके द्वारा दी गई तमाम जानकारियां पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएंगी।
