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July 7, 2026

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: नोटों की गड्डियां और खुले नोट, 70 बार चोरी कैमरे में कैद; पहली बार सामने आई SIT रिपोर्ट…

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी की एसआईटी रिपोर्ट सामने आ गई है। इसके मुताबिक, गणना प्रक्रिया की निगरानी के नियमों को ट्रस्ट पदाधिकारियों ने बदलकर कमजोर कर दिया। रिपोर्ट में अनिल मिश्रा की लापरवाही और चोरी में रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की मुख्य भूमिका बताई गई है। वहीं, रिपोर्ट में चंपत राय और गोपाल राव का कहीं भी जिक्र नहीं है।

मंदिर परिसर में सोमवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में रखी गई एसआईटी रिपोर्ट के मुताबिक 6 फरवरी 2025 को गणना प्रक्रिया की निगरानी को लेकर एसओपी तैयार की गई थी। इसमें तय किया गया था कि गणना कक्ष में किस-किसकी आवाजाही रहेगी, गणनाकर्मियों की एंट्री कब होगी और वे कैसे कपड़े पहनेंगे। गणना प्रक्रिया के पहले और बाद में कर्मियों की तलाशी भी होगी, लेकिन निगरानी नियमों को शिथिल कर दिया गया। 

आरोपियों ने इसका फायदा उठाकर रकम पार की। रिपोर्ट में लिखा गया है, यह चिंता व जांच का विषय है कि पदाधिकारियों ने किन परिस्थितियों में ये बदलाव किए? रिपोर्ट में चंपत राय और गोपाल नगरकोटे का जिक्र नहीं होने पर सवाल उठा रहा है कि क्या एसआईटी ने उनको क्लीन चिट दे दी है या विस्तृत जांच में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

वहीं, अनिल मिश्रा की भूमिका पर लिखा है कि उन्हें दान व चढ़ावा प्रबंधन की जिम्मेदारी 20 सितंबर 2024 को दी गई थी। उन्हें गणना प्रक्रिया की निगरानी कर प्रभावी पर्यवेक्षण करना था जो नहीं किया गया। इसलिए उनको दोषी पाया गया है।

27 अप्रैल से पहले भी होती रही चोरी, 70 बार चोरी कैमरे में कैद
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भेंट/चढ़ावा गणना कक्ष में हुई चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक हुई है। यह रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में प्रस्तुत की गई। एसआईटी ने प्रथम दृष्टया माना है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भेंट/चढ़ावा की गणना प्रक्रिया के दौरान चोरी और गबन की घटनाएं हुईं।

27 अप्रैल से पहले भी चोरी और गबन होता रहा, लेकिन उस अवधि का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न होने के कारण वास्तविक नुकसान का आकलन संभव नहीं हो सका। आरोपियों के बयान और बैंक खातों में मिली आय से अधिक धनराशि से यह संकेत मिले हैं।

उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में गणना कर्मियों की ओर से करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले नोट छिपाने की घटनाएं दर्ज मिलीं। रिपोर्ट में न केवल चोरी और गबन की घटनाओं की पुष्टि की गई है, बल्कि ट्रस्ट, बैंक, गणना कक्ष की निगरानी व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है, जबकि विस्तृत जांच अभी जारी है।

एसआईटी ने पाया कि चोरी इसलिए संभव हुई क्योंकि निर्धारित सुरक्षा उपायों का प्रभावी पालन नहीं किया गया। प्रवेश और निकास पर तलाशी, निर्धारित वेशभूषा, निजी सामान पर प्रतिबंध, हुंडीवार गणना, मूल्यवर्गवार अभिलेखीकरण और प्रभावी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं व्यवहार में लागू नहीं थीं। ट्रस्ट और बैंक दोनों के प्रतिनिधि मौजूद रहते थे, फिर भी अपराध लगातार होता रहा।

एसआईटी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों पर एफआईआर की संस्तुति की थी। इसके अलावा एसआईटी ने गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, गणना कक्ष में मौजूद अन्य पर्यवेक्षणीय कर्मियों तथा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की संस्तुति की है।

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